भोपाल के केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान का प्रौद्योगिकी पार्क किसानों और उद्यमियों को कटाई के बाद भंडारण तथा प्रसंस्करण की तकनीकें दिखाता है।
चने के तीन टन क्षमता वाले साइलो में तापमान और नमी के अनुसार हवा चलती है। संस्थान ने इसमें छह से सात महीने भंडारण की उपयोगिता बताई है।
प्याज भंडार के पाँच हिस्सों में हर एक की क्षमता एक टन है। पाइप के जरिए इनमें हवा पहुँचती है।
प्रशिक्षण सुविधाओं में फल-सब्जियों का एक टन क्षमता वाला शीतल भंडार और सौर ऊर्जा से उपज सुखाने के उपकरण भी हैं।
कंकड़ अलग, फिर छिलका और पिसाई
संस्थान का मिलेट प्रसंस्करण केंद्र छोटे उद्योगों, किसान समूहों और प्रशिक्षण लेने वालों के लिए मशीनों की पूरी श्रृंखला दिखाता है। इसकी समग्र क्षमता 50–60 किलो प्रति घंटा बताई गई है।
पहले सफाई और आकार के अनुसार छँटाई होती है। अगली मशीन कंकड़ और भारी अशुद्धियाँ अलग करती है। फिर छिलका उतारने, पॉलिश करने और आटा बनाने के उपकरण आते हैं।
दलिया बनाने की मशीन दाने को एक से चार मिलीमीटर के टुकड़ों में बदलती है। केंद्र में भूनने और फुलाने के उपकरण भी हैं, जिनसे अलग उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
अप्रैल 2026 के रायसेन कृषि महोत्सव में इन मशीनों का प्रदर्शन किया गया। इस व्यवस्था में खेत से निकला एक ही अनाज अलग-अलग प्रसंस्करण चरणों से गुजरता है।
गहराई: जगह से समझिए
किसान की खबर, थाली तक। सुर्खी यह है: अनाज बचाने से दलिया बनाने तक: भोपाल के केंद्र में खेती के बाद का काम Kisani NEWS इसे भोपाल से पढ़ता है। सार यही रहा: सीआईएई के प्रौद्योगिकी पार्क में चने का छोटा साइलो और प्याज का हवादार भंडार है। मिलेट प्रसंस्करण केंद्र में सफाई से आटा बनाने तक की मशीनें मिलती हैं। विषय भोपाल / भंडारण और प्रसंस्करण है। इससे आगे की गहराई उसी तथ्य को खोलती है — नया दावा नहीं।
जगह, समय, काम
खबर की पहली पहचान जगह है। भोपाल। अगर आपके जिले का नाम इसमें है, तो पन्ना आपके काम का है। अगर नहीं, तो भी प्रक्रिया वही हो सकती है — कॉलेज, पोर्टल, घर, शेड या ड्रिल चौकी पर। तारीख लेख के ऊपर और स्रोत बॉक्स में दो जगह लिखी है। Kisani NEWS तारीख नहीं घुमाता।
मूल सूचना का शीर्षक स्रोत में यों है: On-Farm Agro-Processing Technology Park at ICAR-CIAE, Bhopal। हमने उसे खींचा, अपनी ज़बान में समझाया, लिंक नीचे रखा। सरकारी साइट खबर का क्लिक नहीं है।
तीन बातें, खोलकर
1. प्रदर्शन साइलो में तीन टन चना रखने की क्षमता। Kisani NEWS इसे दोहराता है ताकि पाठक को रटने की ज़रूरत न पड़े। मतलब साफ़ है: यह बिंदु विज्ञप्ति का है, हमारे अनुमान का नहीं। भोपाल में इसका असर आपको अपने काउंटर पर जाँचना होगा।
साफ़ भाषा में: प्रदर्शन साइलो में तीन टन चना रखने की क्षमता। जगह भोपाल है। Kisani NEWS इसे मंच की तस्वीर से नहीं, काम की जगह से पढ़ता है। तारीख स्रोत बॉक्स में है। अगर आपके घर, शेड, स्कूल या अड्डे पर इसका असर है, तो उसी दिन पर्ची मिलाइए। जो नहीं लिखा गया — हर लाभार्थी का नाम, हर शिविर की घड़ी — उसे हम नहीं गढ़ते। न सरकार का पोर्टल बनना है, न निंदा लिखनी है।
2. प्याज भंडार के पाँच अलग हिस्से। Kisani NEWS इसे दोहराता है ताकि पाठक को रटने की ज़रूरत न पड़े। मतलब साफ़ है: यह बिंदु विज्ञप्ति का है, हमारे अनुमान का नहीं। भोपाल में इसका असर आपको अपने काउंटर पर जाँचना होगा।
भोपाल वाले ठहरिए। वाक्य दोहराते हैं: प्याज भंडार के पाँच अलग हिस्से। इसके बाद की कथा आप अपनी गली में पूरी करते हैं — बैंक, कॉलेज, वर्कशॉप, घर या दमकल चौकी पर। Kisani NEWS केवल उतना लिखता है जितना स्रोत ने दिया। बाकी सवाल पूछिए अपने दफ्तर से। पूरी बात इसी पन्ने पर है; बाहर के सरकारी क्लिक खबर नहीं हैं।
3. मिलेट मशीनों की इकाई: 50–60 किलो प्रति घंटा क्षमता। Kisani NEWS इसे दोहराता है ताकि पाठक को रटने की ज़रूरत न पड़े। मतलब साफ़ है: यह बिंदु विज्ञप्ति का है, हमारे अनुमान का नहीं। भोपाल में इसका असर आपको अपने काउंटर पर जाँचना होगा।
किसान की खबर, थाली तक। भोपाल से यह पंक्ति खुलती है: मिलेट मशीनों की इकाई: 50–60 किलो प्रति घंटा क्षमता। Kisani NEWS इसमें नई संख्या नहीं जोड़ता। जो आँकड़ा पहले पन्ने पर है, वही रहेगा। जो गली, घंटा या सिर का हिसाब स्रोत ने नहीं लिखा, हम अनुमान से नहीं भरते। पाठक को वही करना है जो स्रोत ने बताया — पोर्टल, दफ्तर या काउंटर। व्हाट्सऐप वाला लिंक आगे बढ़ाने से पहले इसी पन्ने का स्रोत बॉक्स खोलिए। कार्ड सरकार की साइट पर नहीं ले जाता।
किसान की खबर, थाली तक। भोपाल से यह पंक्ति खुलती है: भोपाल के केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान का प्रौद्योगिकी पार्क किसानों और उद्यमियों को कटाई के बाद भंडारण त। Kisani NEWS इसमें नई संख्या नहीं जोड़ता। जो आँकड़ा पहले पन्ने पर है, वही रहेगा। जो गली, घंटा या सिर का हिसाब स्रोत ने नहीं लिखा, हम अनुमान से नहीं भरते। पाठक को वही करना है जो स्रोत ने बताया — पोर्टल, दफ्तर या काउंटर। व्हाट्सऐप वाला लिंक आगे बढ़ाने से पहले इसी पन्ने का स्रोत बॉक्स खोलिए। कार्ड सरकार की साइट पर नहीं ले जाता।
साफ़ भाषा में: चने के तीन टन क्षमता वाले साइलो में तापमान और नमी के अनुसार हवा चलती है। संस्थान ने इसमें छह से सात महीने भंडा। जगह भोपाल है। Kisani NEWS इसे मंच की तस्वीर से नहीं, काम की जगह से पढ़ता है। तारीख स्रोत बॉक्स में है। अगर आपके घर, शेड, स्कूल या अड्डे पर इसका असर है, तो उसी दिन पर्ची मिलाइए। जो नहीं लिखा गया — हर लाभार्थी का नाम, हर शिविर की घड़ी — उसे हम नहीं गढ़ते। न सरकार का पोर्टल बनना है, न निंदा लिखनी है।
भोपाल वाले ठहरिए। वाक्य दोहराते हैं: प्याज भंडार के पाँच हिस्सों में हर एक की क्षमता एक टन है। पाइप के जरिए इनमें हवा पहुँचती है। इसके बाद की कथा आप अपनी गली में पूरी करते हैं — बैंक, कॉलेज, वर्कशॉप, घर या दमकल चौकी पर। Kisani NEWS केवल उतना लिखता है जितना स्रोत ने दिया। बाकी सवाल पूछिए अपने दफ्तर से। पूरी बात इसी पन्ने पर है; बाहर के सरकारी क्लिक खबर नहीं हैं।
किसान की खबर, थाली तक। भोपाल से यह पंक्ति खुलती है: प्रशिक्षण सुविधाओं में फल-सब्जियों का एक टन क्षमता वाला शीतल भंडार और सौर ऊर्जा से उपज सुखाने के उपकरण भी हैं। Kisani NEWS इसमें नई संख्या नहीं जोड़ता। जो आँकड़ा पहले पन्ने पर है, वही रहेगा। जो गली, घंटा या सिर का हिसाब स्रोत ने नहीं लिखा, हम अनुमान से नहीं भरते। पाठक को वही करना है जो स्रोत ने बताया — पोर्टल, दफ्तर या काउंटर। व्हाट्सऐप वाला लिंक आगे बढ़ाने से पहले इसी पन्ने का स्रोत बॉक्स खोलिए। कार्ड सरकार की साइट पर नहीं ले जाता।
भोपाल वाले ठहरिए। वाक्य दोहराते हैं: संस्थान का मिलेट प्रसंस्करण केंद्र छोटे उद्योगों, किसान समूहों और प्रशिक्षण लेने वालों के लिए मशीनों की पूरी श। इसके बाद की कथा आप अपनी गली में पूरी करते हैं — बैंक, कॉलेज, वर्कशॉप, घर या दमकल चौकी पर। Kisani NEWS केवल उतना लिखता है जितना स्रोत ने दिया। बाकी सवाल पूछिए अपने दफ्तर से। पूरी बात इसी पन्ने पर है; बाहर के सरकारी क्लिक खबर नहीं हैं।
किसान की खबर, थाली तक। भोपाल से यह पंक्ति खुलती है: पहले सफाई और आकार के अनुसार छँटाई होती है। अगली मशीन कंकड़ और भारी अशुद्धियाँ अलग करती है। फिर छिलका उतारने, प। Kisani NEWS इसमें नई संख्या नहीं जोड़ता। जो आँकड़ा पहले पन्ने पर है, वही रहेगा। जो गली, घंटा या सिर का हिसाब स्रोत ने नहीं लिखा, हम अनुमान से नहीं भरते। पाठक को वही करना है जो स्रोत ने बताया — पोर्टल, दफ्तर या काउंटर। व्हाट्सऐप वाला लिंक आगे बढ़ाने से पहले इसी पन्ने का स्रोत बॉक्स खोलिए। कार्ड सरकार की साइट पर नहीं ले जाता।
साफ़ भाषा में: दलिया बनाने की मशीन दाने को एक से चार मिलीमीटर के टुकड़ों में बदलती है। केंद्र में भूनने और फुलाने के उपकरण भी। जगह भोपाल है। Kisani NEWS इसे मंच की तस्वीर से नहीं, काम की जगह से पढ़ता है। तारीख स्रोत बॉक्स में है। अगर आपके घर, शेड, स्कूल या अड्डे पर इसका असर है, तो उसी दिन पर्ची मिलाइए। जो नहीं लिखा गया — हर लाभार्थी का नाम, हर शिविर की घड़ी — उसे हम नहीं गढ़ते। न सरकार का पोर्टल बनना है, न निंदा लिखनी है।
पाठक अभी क्या करे
एक: सुर्खी और तारीख अपने फ़ोन में सहेजिए। दो: स्रोत बॉक्स का लिंक खोलकर मूल पन्ना देखिए — शेयर करने से पहले। तीन: भोपाल के दफ्तर, पोर्टल या काउंटर पर अपनी पर्ची मिलाइए। चार: जो संख्या इस पन्ने पर नहीं है, उसे किसी ग्रुप से मत उठाइए। पाँच: कार्ड आपको सरकार की साइट पर नहीं भेजता; पूरी बात यहीं है।
घर बैठे करना हो तो आधिकारिक पोर्टल और बैंक या संस्था का अपना पन्ना खोलिए। व्हाट्सऐप वाला greyscale पोस्टर काफी नहीं। Kisani NEWS पोस्टर की जगह रिपोर्ट लिखता है।
जो लिखा नहीं गया
हर सिर का हिसाब, हर गली का पता, हर शिविर की घड़ी — अगर स्रोत ने नहीं दिया, Kisani NEWS नहीं गढ़ता। फोटो फ़ाइल हो सकती है; कैप्शन ईमानदार रहेगा। न सरकार का पोर्टल बनना है, न सरकार की निंदा। बीच में खड़े होकर समझाना है।
Kisani NEWS इस खबर को ऐसे क्यों लिख रहा है
Kisani NEWS अनाज से थाली तक की खबर है, मंच की नहीं। पहचान विषय और जगह से आती है। संख्या वही रहेगी जो स्रोत ने दी। अंदाज़ बोलचाल का रहेगा — अधूरे टुकड़े नहीं, पूरे वाक्य। भोपाल से शुरू करो, मंच की ताली से नहीं।
स्रोत और संदर्भ
- ICAR / केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल · On-Farm Agro-Processing Technology Park at ICAR-CIAE, Bhopal ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- ICAR / केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल · Centre of Excellence on Efficient Millet Processing Machinery ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।


